कृषि भूमि का रकबा कम किए जाने के एक मामले में हाईकोर्ट ने राजस्व विभाग को नोटिस जारी किया है और साथ ही यथास्थिति बनाए रखने का सख्त आदेश भी दिया है। यानी जब तक अदालत में इस मामले की सुनवाई पूरी नहीं होती, जमीन की स्थिति में कोई बदलाव नहीं किया जा सकेगा।
मामला क्या है
शिकायत यह है कि किसी कृषि भूमि का रकबा — यानी दर्ज क्षेत्रफल — सरकारी रिकॉर्ड में घटा दिया गया। भूमि के रिकॉर्ड में इस तरह की हेरफेर से किसान या भूमि मालिक को सीधा नुकसान होता है, क्योंकि सरकारी मुआवजा, बैंक लोन और खेती से जुड़ी सरकारी योजनाओं का लाभ सब कुछ दर्ज रकबे पर ही निर्भर करता है।
इस मामले को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। अदालत ने प्रारंभिक सुनवाई में ही मामले को गंभीरता से लिया और राजस्व विभाग से जवाब तलब किया।
हाईकोर्ट ने क्या कहा
अदालत ने राजस्व विभाग को नोटिस जारी करते हुए स्पष्ट किया कि जब तक मामले का निपटारा नहीं हो जाता, जमीन के रिकॉर्ड या उसकी स्थिति में कोई बदलाव नहीं होना चाहिए। यथास्थिति का यह आदेश याचिकाकर्ता को तत्काल राहत देता है और विभाग के किसी भी एकतरफा कदम पर रोक लगाता है।
राजस्व विभाग को अब तय समय सीमा के भीतर अपना पक्ष अदालत के सामने रखना होगा।
किसानों पर क्या असर पड़ता है
- भूमि रकबा कम होने से किसान को मिलने वाला सरकारी मुआवजा घट जाता है।
- बैंक से कृषि ऋण लेने में रकबा अहम भूमिका निभाता है — रकबा कम तो कर्ज कम।
- प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और अन्य केंद्र-राज्य सरकार की कृषि योजनाओं का लाभ भी दर्ज भूमि के हिसाब से ही मिलता है।
- जमीन की खरीद-बिक्री में भी सही रकबा दर्ज होना जरूरी है, वरना विवाद होता है।
अब आगे क्या होगा
राजस्व विभाग को नोटिस का जवाब देना होगा। हाईकोर्ट अगली सुनवाई में दोनों पक्षों की दलीलें सुनेगा। यदि विभाग का जवाब संतोषजनक नहीं रहा, तो अदालत आगे की कार्रवाई का निर्देश दे सकती है।
यह मामला इसलिए भी अहम है क्योंकि भूमि रिकॉर्ड में गड़बड़ी की शिकायतें राजस्थान समेत कई राज्यों में सामने आती रहती हैं। हाईकोर्ट का यह कदम यह संकेत देता है कि अदालतें इस तरह की अनियमितताओं को नजरअंदाज नहीं करेंगी।
फिलहाल यथास्थिति आदेश के चलते जमीन से जुड़ा कोई भी सरकारी कदम तब तक रुका रहेगा जब तक हाईकोर्ट इस मामले में कोई अंतिम फैसला नहीं सुना देता।

