राजस्थान में लोकसभा सीटों की संख्या आने वाले वर्षों में बड़े पैमाने पर बदल सकती है। परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद राज्य में सांसदों की संख्या मौजूदा 25 से बढ़कर 38 तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। इसके तहत जयपुर और जोधपुर समेत राज्य की 7 बड़ी लोकसभा सीटों को दो-दो हिस्सों में बांटा जा सकता है।
परिसीमन क्या है और क्यों होता है
परिसीमन यानी Delimitation एक संवैधानिक प्रक्रिया है जिसमें जनगणना के आंकड़ों के आधार पर संसदीय और विधानसभा क्षेत्रों की सीमाएं नए सिरे से तय की जाती हैं। देश में 2026 के बाद होने वाले परिसीमन को लेकर पिछले कुछ समय से चर्चा तेज है। 2021 की जनगणना अभी तक नहीं हुई है, लेकिन एक बार यह पूरी होते ही परिसीमन का रास्ता खुल जाएगा।
राजस्थान देश के सबसे बड़े राज्यों में से एक है। क्षेत्रफल के लिहाज से यह नंबर एक है, और जनसंख्या भी तेजी से बढ़ी है। ऐसे में माना जा रहा है कि नए परिसीमन में राजस्थान को काफी फायदा हो सकता है और यहां की सीटें उल्लेखनीय रूप से बढ़ सकती हैं।
कौन सी 7 सीटें बंट सकती हैं
जानकारी के अनुसार जयपुर और जोधपुर जैसे बड़े शहरों की सीटें बंटवारे की कतार में सबसे आगे हो सकती हैं। इन दोनों शहरों की आबादी पिछले दो दशकों में कई गुना बढ़ी है। एक सांसद के लिए इतने बड़े और घनी आबादी वाले क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करना मुश्किल माना जाता है।
- जयपुर लोकसभा सीट — दो हिस्सों में बंट सकती है
- जोधपुर लोकसभा सीट — शहरी विस्तार के चलते बंटवारे की संभावना
- पांच अन्य बड़ी सीटें भी इस दायरे में आ सकती हैं
हालांकि अभी यह सब प्रारंभिक अनुमान और चर्चा के स्तर पर है। परिसीमन आयोग का गठन और उसकी सिफारिशें ही अंतिम तस्वीर तय करेंगी।
राजनीतिक असर क्या होगा
सीटें बढ़ने से राजस्थान का केंद्र की राजनीति में वजन और बढ़ेगा। अभी राज्य से 25 लोकसभा सांसद चुने जाते हैं। अगर यह संख्या 38 तक पहुंचती है तो राष्ट्रीय स्तर पर राजस्थान की भूमिका काफी बड़ी हो जाएगी। सरकार बनाने में भी राज्य के सांसदों की अहमियत बढ़ेगी।
नई सीटें बनने से नए राजनीतिक समीकरण भी तैयार होंगे। कई मौजूदा बड़े सांसदी क्षेत्र टूटेंगे, जिससे नए नेताओं के लिए अवसर खुलेंगे और पुराने नेताओं को अपनी रणनीति बदलनी होगी।
अभी कब तक होगा फैसला
परिसीमन की प्रक्रिया जनगणना के बाद शुरू होती है। देश में अगली जनगणना होने के बाद ही आधिकारिक तौर पर इस पर काम आगे बढ़ेगा। फिलहाल जो चर्चाएं हो रही हैं वे संभावित परिदृश्य पर आधारित हैं। सरकार की तरफ से इस पर कोई आधिकारिक घोषणा अभी नहीं हुई है।
राजस्थान की आम जनता के लिए इसका मतलब होगा कि उनके इलाके का प्रतिनिधित्व करने वाला सांसद ज्यादा करीब और ज्यादा जवाबदेह होगा — क्षेत्र छोटा होने से पहुंच आसान होती है।

