राजस्थान: प्राइमरी स्कूल बच्चों की मेंटल हेल्थ के लिए सरकार ने लॉन्च किया खास प्रोग्राम

राजस्थान सरकार ने प्राइमरी स्कूलों के बच्चों की मानसिक सेहत सुधारने के लिए एक खास कार्यक्रम शुरू किया है। जानें इस पहल का मकसद और असर।

राजस्थान: प्राइमरी स्कूल बच्चों की मेंटल हेल्थ के लिए सरकार ने लॉन्च किया खास प्रोग्राम

राजस्थान सरकार ने प्रदेश के सरकारी प्राइमरी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की मानसिक सेहत को बेहतर बनाने के लिए एक विशेष कार्यक्रम शुरू किया है। यह पहल उन छोटे बच्चों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है जो आमतौर पर मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच से दूर रहते हैं।

क्या है यह कार्यक्रम

इस प्रोग्राम के तहत सरकारी प्राइमरी स्कूलों में बच्चों के भावनात्मक और मानसिक विकास पर खास ध्यान दिया जाएगा। स्कूल स्तर पर ऐसे उपाय किए जाएंगे जिससे बच्चे पढ़ाई का तनाव, घर की परेशानियां और बाकी मानसिक दबाव बेहतर तरीके से संभाल सकें।

प्राइमरी उम्र यानी शुरुआती कक्षाओं के बच्चे अक्सर अपनी परेशानियां खुलकर नहीं बोल पाते। ऐसे में स्कूल में ही सही माहौल और सही मार्गदर्शन मिलना उनके लिए बहुत जरूरी होता है। सरकार की यह कोशिश उसी जरूरत को पूरा करने की दिशा में है।

क्यों जरूरी थी यह पहल

पिछले कुछ सालों में देशभर में बच्चों और किशोरों में मानसिक तनाव के मामले बढ़े हैं। राजस्थान जैसे बड़े राज्य में, जहां दूरदराज के गांवों में भी लाखों बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ते हैं, वहां मेंटल हेल्थ की सुविधाएं पहले से बेहद सीमित रही हैं।

  • ग्रामीण इलाकों में मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों की भारी कमी है।
  • परिवार और समाज में मेंटल हेल्थ को लेकर जागरूकता अभी भी कम है।
  • छोटे बच्चों में तनाव और चिंता के संकेत अक्सर पहचाने नहीं जाते।
  • कोरोना के बाद से बच्चों की पढ़ाई और सामाजिक जीवन दोनों पर असर पड़ा है।

इन्हीं वजहों से स्कूल स्तर पर मेंटल हेल्थ को लेकर काम करना जरूरी माना जा रहा था।

शिक्षकों की भूमिका अहम

इस तरह के कार्यक्रमों में शिक्षकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है क्योंकि वे बच्चों के सबसे करीब होते हैं। संभावना है कि इस प्रोग्राम के तहत शिक्षकों को भी जरूरी प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि वे बच्चों में मानसिक परेशानी के शुरुआती संकेतों को पहचान सकें और उन्हें सही मदद दिला सकें।

बच्चे जब सहज महसूस करते हैं तो पढ़ाई में भी बेहतर करते हैं। इसलिए यह कदम सिर्फ मानसिक स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर बच्चों की पढ़ाई और समग्र विकास पर भी पड़ेगा।

आगे क्या होगा

राजस्थान सरकार की यह पहल अगर ठीक से जमीन पर उतरती है तो यह दूसरे राज्यों के लिए भी एक मॉडल बन सकती है। फिलहाल इस कार्यक्रम के विस्तार और इसे चरणबद्ध तरीके से लागू करने की तैयारी है।

सरकारी स्कूलों में बच्चों की मानसिक सेहत पर ध्यान देना अभी देश में नई शुरुआत मानी जाती है और राजस्थान का यह कदम इस दिशा में एक सकारात्मक प्रयास है।

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