राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत करीब साढ़े तीन साल के लंबे अंतराल के बाद दिल्ली स्थित 10 जनपथ पहुंचे। कांग्रेस की शीर्ष नेतृत्व से यह मुलाकात राजस्थान की सियासत में एक बड़े बदलाव का संकेत मानी जा रही है।
इतने लंबे समय बाद क्यों हुई यह मुलाकात
गहलोत और कांग्रेस हाईकमान के बीच पिछले कुछ वर्षों से दूरी की चर्चा राजनीतिक हलकों में होती रही है। साल 2022 में राजस्थान में जो सियासी उठापटक हुई थी, उसके बाद से गहलोत और पार्टी नेतृत्व के रिश्तों को लेकर सवाल उठते रहे। तब से अब तक 10 जनपथ से उनकी यह दूरी कांग्रेस के भीतर भी चर्चा का विषय बनी रही।
अब साढ़े तीन साल के बाद हुई इस मुलाकात को राजनीतिक विश्लेषक सामान्य शिष्टाचार भेंट से अधिक अहम मान रहे हैं।
राजस्थान कांग्रेस की सियासत पर असर
राजस्थान में कांग्रेस अभी विपक्ष में है। दिसंबर 2023 के विधानसभा चुनाव में पार्टी को हार का सामना करना पड़ा था और भाजपा ने सत्ता संभाली। तब से कांग्रेस प्रदेश में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
ऐसे में गहलोत की हाईकमान से यह नजदीकी कई सवाल खड़े करती है:
- क्या पार्टी राजस्थान में नए सिरे से संगठन खड़ा करने की तैयारी में है?
- क्या गहलोत को कोई नई जिम्मेदारी दी जा सकती है?
- क्या प्रदेश कांग्रेस के भीतर गुटबाजी खत्म करने की कोशिश हो रही है?
- आगामी स्थानीय निकाय या उपचुनावों को लेकर कोई रणनीति बन रही है?
गहलोत की पार्टी में भूमिका पर नजर
अशोक गहलोत राजस्थान कांग्रेस के सबसे वरिष्ठ और अनुभवी नेताओं में से एक हैं। तीन बार मुख्यमंत्री रह चुके गहलोत का राज्य में जमीनी पकड़ अभी भी मजबूत मानी जाती है। पार्टी के अंदर उनके समर्थकों की अच्छी-खासी तादाद है।
हाईकमान से इस मुलाकात के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी उन्हें किस भूमिका में आगे रखती है — चाहे वह संगठन का काम हो या फिर किसी राष्ट्रीय जिम्मेदारी का मामला।
आगे क्या हो सकता है
कांग्रेस फिलहाल कई राज्यों में चुनावी तैयारी में जुटी है और संगठन को मजबूत करने पर जोर दे रही है। राजस्थान में भी पार्टी को अगले विधानसभा चुनाव से पहले जमीनी स्तर पर काम करना होगा।
गहलोत जैसे अनुभवी नेता की सक्रियता पार्टी के लिए फायदेमंद हो सकती है, लेकिन यह तभी होगा जब पार्टी के भीतर की पुरानी गुटीय खींचतान थमे।
फिलहाल इस मुलाकात के बाद राजस्थान कांग्रेस के कार्यकर्ताओं और नेताओं की नजर दिल्ली पर टिकी है कि हाईकमान आगे क्या फैसला लेता है।

