राजस्थान पुलिस ने एक बड़े मेडिकल पेपर लीक रैकेट का पर्दाफाश किया है। इस गिरोह पर आरोप है कि वह मेडिकल प्रवेश परीक्षा का पर्चा पहले से उपलब्ध कराता था और इसके बदले छात्रों से साढ़े पांच लाख रुपये तक वसूलता था।
मामला क्या है
जांच में सामने आया कि यह गिरोह मेडिकल प्रतियोगी परीक्षाओं में बैठने वाले उम्मीदवारों को टारगेट करता था। परिवार से पैसे लेकर परीक्षा से पहले ही प्रश्नपत्र या उसके जवाब मुहैया कराने का वादा किया जाता था। एक उम्मीदवार को पास कराने के लिए 5.5 लाख रुपये की रकम तय होती थी।
यह धंधा काफी समय से चल रहा था। गिरोह के तार कई जगहों से जुड़े बताए जा रहे हैं और पुलिस इस पूरे नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी है।
पुलिस की कार्रवाई
राजस्थान पुलिस की टीम ने छापेमारी कर इस रैकेट से जुड़े कई लोगों को हिरासत में लिया। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कितने छात्रों ने इस रैकेट का फायदा उठाया और पेपर किस स्तर से लीक होता था।
- परीक्षा पास कराने के लिए 5.5 लाख रुपये की मांग की जाती थी
- मेडिकल प्रवेश परीक्षा के अभ्यर्थी इस रैकेट के निशाने पर थे
- राजस्थान पुलिस ने छापेमारी कर आरोपियों को पकड़ा
- पूरे नेटवर्क की जांच अभी जारी है
छात्रों और अभिभावकों पर असर
इस तरह के रैकेट उन छात्रों के लिए सबसे बड़ा नुकसान हैं जो ईमानदारी से मेहनत करके डॉक्टर बनने का सपना देखते हैं। जब पेपर लीक होता है तो मेरिट सूची ही दूषित हो जाती है और सच्चे काबिल उम्मीदवार पीछे रह जाते हैं।
अभिभावकों पर भी दबाव बनाया जाता है — बच्चे का भविष्य संवारने के नाम पर लाखों रुपये ऐंठे जाते हैं। कई बार परिवार कर्ज लेकर यह रकम देते हैं और बाद में ठगी का शिकार बन जाते हैं।
अब आगे क्या
पुलिस इस मामले में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। जांच एजेंसियां यह भी देखेंगी कि क्या परीक्षा संचालन से जुड़े किसी व्यक्ति की इसमें भूमिका है। इस तरह के मामलों में आमतौर पर परीक्षा निकाय को भी अपनी प्रक्रियाएं सख्त करनी पड़ती हैं।
राजस्थान में पहले भी भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी के मामले सामने आ चुके हैं, इसलिए इस खुलासे ने एक बार फिर परीक्षा सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

