राजस्थान के नाथद्वारा में श्रीनाथजी की ज्येष्ठ स्नान यात्रा को लेकर तैयारियां अपने आखिरी दौर में पहुंच गई हैं। इस पवित्र उत्सव के लिए श्रीनाथजी के अभिषेक हेतु विशेष पवित्र जल भर लिया गया है।
क्या है ज्येष्ठ स्नान यात्रा
ज्येष्ठ माह में होने वाली यह स्नान यात्रा वैष्णव परंपरा का बेहद अहम पर्व है। हर साल ज्येष्ठ पूर्णिमा के आसपास श्रीनाथजी को विशेष रूप से स्नान कराया जाता है और उनका भव्य श्रृंगार किया जाता है। यह आयोजन देशभर के वैष्णव भक्तों के लिए आस्था का बड़ा केंद्र है।
नाथद्वारा, राजस्थान के राजसमंद जिले में स्थित है और यहां का श्रीनाथजी मंदिर पुष्टिमार्गीय वैष्णव संप्रदाय का सबसे प्रमुख तीर्थ माना जाता है। देश के कोने-कोने से श्रद्धालु इस यात्रा में शामिल होने के लिए नाथद्वारा पहुंचते हैं।
अभिषेक के लिए पवित्र जल की तैयारी
इस बार भी परंपरा के अनुसार श्रीनाथजी के अभिषेक के लिए विशेष स्थान से पवित्र जल लाया गया है और उसे मंदिर परिसर में सुरक्षित रखा गया है। यह पूरी प्रक्रिया धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ पूरी की जाती है।
- ज्येष्ठ पूर्णिमा पर होता है मुख्य स्नान उत्सव
- पवित्र जल से श्रीनाथजी का अभिषेक किया जाता है
- मंदिर प्रशासन ने सभी तैयारियां समय पर पूरी की हैं
- बड़ी संख्या में भक्तों के आने की उम्मीद है
श्रद्धालुओं के लिए इंतजाम
इतने बड़े धार्मिक आयोजन में देश के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में भक्त नाथद्वारा पहुंचते हैं। ऐसे में मंदिर प्रशासन और स्थानीय प्रशासन दोनों की ओर से श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाते हैं।
नाथद्वारा में इस दौरान होटल और धर्मशालाएं भर जाती हैं। स्थानीय दुकानदारों और व्यापारियों के लिए भी यह समय बेहद व्यस्त रहता है। पूरा कस्बा उत्सव के रंग में रंग जाता है।
धार्मिक महत्व
पुष्टिमार्गीय परंपरा में यह स्नान यात्रा सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि भगवान श्रीनाथजी की सेवा का सबसे विशेष अवसर माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन दर्शन करने वाले भक्तों को विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।
तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं और उत्सव के दिन नाथद्वारा में भक्तों का जनसैलाब उमड़ने की पूरी संभावना है।

