राजस्थान में इस बार मानसून की दस्तक अब ज्यादा दूर नहीं है। मौसम विभाग के संकेतों के मुताबिक दक्षिण-पूर्वी और पूर्वी राजस्थान में मानसूनी हवाएं सक्रिय हो चुकी हैं, जो इस बात का इशारा है कि प्रदेश में बारिश का मौसम दरवाजे पर आ खड़ा हुआ है।
किन इलाकों में पहले पहुंचेगा मानसून
आमतौर पर राजस्थान में मानसून का प्रवेश दक्षिण-पूर्वी हिस्से से होता है। बांसवाड़ा, डूंगरपुर, उदयपुर और झालावाड़ जैसे जिले सबसे पहले मानसून की बारिश का फायदा उठाते हैं। इसके बाद धीरे-धीरे मानसून पूर्वी राजस्थान की तरफ बढ़ता है, जिसमें जयपुर, अलवर, भरतपुर और कोटा संभाग के जिले शामिल हैं।
इस बार भी यही क्रम देखने को मिल सकता है। मानसूनी हवाओं के सक्रिय होने से इन इलाकों में उमस और गर्मी में थोड़ी राहत मिलने लगी है।
मौसम का मिजाज अभी कैसा है
मानसून से पहले की नमी के चलते प्रदेश के कई हिस्सों में आसमान में बादल छाने लगे हैं। कहीं-कहीं हल्की बूंदाबांदी भी हो रही है। यह मानसून-पूर्व गतिविधि है, जो संकेत देती है कि मुख्य मानसून जल्द ही राजस्थान में कदम रख सकता है।
- दक्षिण-पूर्वी राजस्थान में मानसूनी हवाएं पहुंच चुकी हैं।
- पूर्वी जिलों में भी नमी और बादलों की गतिविधि बढ़ी है।
- मानसून का पहला असर आदिवासी बेल्ट वाले जिलों में दिखेगा।
- पश्चिमी राजस्थान को अभी थोड़ा और इंतजार करना पड़ सकता है।
किसानों और आम लोगों के लिए क्या मायने
राजस्थान एक कृषि प्रधान राज्य है और खरीफ की फसल पूरी तरह मानसून पर निर्भर रहती है। बाजरा, मूंग, मूंगफली और सोयाबीन जैसी फसलें इसी मौसम में बोई जाती हैं। मानसून की समय पर दस्तक किसानों के लिए राहत की खबर होती है।
वहीं शहरी इलाकों में गर्मी से परेशान लोग भी बारिश का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। जयपुर समेत कई शहरों में पिछले कुछ हफ्तों से तापमान काफी ऊंचा बना हुआ था, ऐसे में मानसून की हवाएं सक्रिय होना एक अच्छी खबर है।
आगे क्या उम्मीद है
मौसम विशेषज्ञ मानते हैं कि जैसे-जैसे मानसून उत्तर की तरफ बढ़ेगा, राजस्थान के बाकी हिस्सों में भी बारिश शुरू होगी। हालांकि पश्चिमी राजस्थान यानी जोधपुर, बीकानेर और जैसलमेर जैसे रेगिस्तानी इलाकों तक मानसून पहुंचने में थोड़ा समय लगता है।
फिलहाल दक्षिण-पूर्वी और पूर्वी राजस्थान के लोगों के लिए अगले कुछ दिन महत्वपूर्ण रहने वाले हैं — मानसून की आधिकारिक दस्तक कभी भी हो सकती है।

